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छत्तीसगढ़

12 से 15 घंटे कि नौकरी, खाना भी समय पर नहीं, रोजाना 100 फोन कॉल्स

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बीएलओ ने बताएं परेशानी, कहां तन, मन और धन लगाकर कर रहें हैं काम

विपिन कुमार सोनवानी की रिपोर्ट

देवभोग/गरियाबंद.. मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसईआर) के काम में लगे बूथ लेवल कर्मचारी के काम काज कि जानकारी लेने जब नईदुनिया कि टिम धरातल में पहुंची और मुयाना कि तो कुछ बीएलओ ने अपनी नाम न बतानें के एवज में अपनी परेशानी साझा करते हुए कहें कि हमें सुबह से रात तक काम करना पड़ रहा हैं।

हम शासकीय कर्मचारी हैं, लेकिन काम दर दर भटकने वाला है। शासन प्रशासन से किसी तरह कि कोई सहयोग नहीं मिल पा रहा हैं, न सहयोग के लिए कोई स्टॉफ दिया । इस काम में तन, मन और धन तीनों खर्च हो रहा हैं। पेट्रोल डीजल से लेकर मोबाइल फोन के लिए शासन प्रशासन के तरफ से कोई सहयोग नहीं मिल रहा हैं। दिनभर में 25 से 30 किलोमिटर का दौरा हो रहा हैं, वहीं रोजाना 50 से 100 लोगों को फोन के माध्यम से जानकारी दी जा रही हैं। शाम को काम खत्म करने के बाद डिजिटलाइजेशन में समय जा रहा हैं। बीएलओ का कहना है कि इस कार्य से पिछे नहीं हट पा रहे है। यह ज़िम्मेदारी महत्वपूर्ण हैं और समय के कमी और अतिरिक्त दबाव के चलते अब तक कुछ बीएलओ के द्वारा आत्म हत्या भी कर चुके हैं।

वहीं सरकारी आंकड़े के मुताबिक़ गरियाबंद जिले में कुल 469476 मतदाता हैं और अब तक 380993 मतदाता का डिजिटलाइजेशन हो चुका हैं और जिले में कुल 73 प्रतिशत का कार्य हो चुका हैं।

शनिवार सुबह तक के आंकड़े के मुताबिक़ जिले के तहसील वार जानकारी इस प्रकार हैं…
छुरा.. 63 प्रतिशत
राजिम.. 79 प्रतिशत
देवभोग.. 72 प्रतिशत
अमलीपदर.. 68 प्रतिशत
मैनपुर.. 68 प्रतिशत
गरियाबंद.. 75 प्रतिशत
फिंगेशर.. 75 प्रतिशत

वहीं पूरे जिले में 574 बूथ में 574 बीएलओ काम कर रहें हैं।

हर दिन 50 से 100 फोन कॉल उठा रहें हैं… वहीं अधिकत्तर बीएलओ का कहना हैं कि प्रतिदिन हमें 50 से 100 फोन कॉल उठाना पड़ रहा हैं। लेकिन हमारी ड्यूटी 24 घंटे कि हो गई हैं। क्यों कि मतदाता को किसी कि जानकारी लेना होता हैं तो वो किसी भी समय में कॉल कर देते हैं। और हमारा बताना ज़िम्मेदारी और जवाबदेह हैं।

जहां आंगनबाड़ी बीएलओ हैं वहां ज्यादा परेशानी.. जिस बूथ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बीएलओ हैं वहां सबसे ज्यादा परेशानी हों रहीं हैं और उनका कार्य प्रतिशत कम हो रहा हैं क्यों की कुछ नियमों को अभी तक पूरी तरह से समझे नहीं हैं और कुछ कालम अंग्रेजी में होने से उनको समझने में दिक्कतें आ रही हैं। इसी के चलते भी काम का प्रतिशत कम हो राहा हैं।

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