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उत्तर प्रदेश

दुधवा नेशनल पार्क में ‘सफारी सीजन-2026’ की तैयारी तेज, आधुनिक सुविधाओं और डिजिटलीकरण पर खास जोर

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फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज से अफजल अली

दुधवा के व्याख्या केंद्र को आधुनिक बनाने की योजना, रिसेप्शन ब्लॉक से 3-डी म्यूरल तक होंगे नए विकास कार्य
 
पर्यटकों को परोसी जाएगी थारू थाली और श्री अन्न थाली, महिला होमस्टे संचालकों को विशेष प्रशिक्षण

सफारी सीजन-2026’ में नई और आधुनिक सुविधाओं के साथ होगा पर्यटकों का स्वागत- जयवीर सिंह

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लखीमपुर खीरी। दुधवा के ‘सफारी सीजन-2026’ पर खास फोकस करते हुए पर्यटन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप पर्यटन विभाग ने इको-टूरिज्म परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘राज्य की समृद्ध दुधवा बेल्ट पर खास ध्यान देते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व के व्याख्या केंद्र को बेहतर व आधुनिक बनाने के लिए अहम परियोजना पर कार्य किया जाएगा। इसके तहत मौजूदा कैंप कार्यालय की मरम्मत की जाएगी और नया, आकर्षक रिसेप्शन ब्लॉक तैयार होगा। साथ ही आधुनिक सुविधाओं से लैस इंटरप्रिटेशन सेंटर, 3-डी म्यूरल और आर्ट पेंटिंग, कैंटीन, मीटिंग हॉल, लाइब्रेरी और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाएगी।’

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मंत्री ने बताया कि, ‘परियोजना अंतर्गत पार्क में लगी पशु आकृतियों का नवीनीकरण, पर्यटकों के बैठने के लिए गार्डन बेंच, साफ-सफाई के लिए डस्टबिन और बेहतर मार्गदर्शन के लिए साइनेज भी शामिल हैं। दीवारों पर जंगल और वन्य जीवों को दर्शाने वाली 3-डी चित्रकारी और पेंटिंग्स की जाएंगी, जिससे पर्यटकों को दुधवा की जैव विविधता और वन्य जीवन के बारे में आसानी से जानकारी मिल सके।
 
सुविधा विस्तार और डिजिटलीकरण की कवायद

मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, ‘दुधवा नेशनल पार्क को पर्यटन के लिहाज से और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए साइनेज, आवास और डिजिटल सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पलिया और दुधवा की ओर जाने वाली प्रमुख सड़कों पर आधुनिक और आकर्षक साइनेज लगाए जाएंगे। 

होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे पर जोर

पर्यटन मंत्री ने बताया कि ‘वर्तमान समय की मांग और वेलनेस टूरिज्म को इको क्षेत्र से जोड़ते हुए नेचर के बीच योग और मेडिटेशन स्पेस भी विकसित किए जाएंगे। साथ ही, क्षेत्र में होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे सुविधाओं के विस्तार को भी गति मिलेगी। अब तक 23 होम स्टे, 2 रिसॉर्ट और 5 होटलों का पंजीकरण किया जा चुका है। पर्यटन को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन जानकारी और बुकिंग व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। यूपी पर्यटन और यूपीटीडीबी की वेबसाइट पर दुधवा टाइगर रिजर्व का अलग पेज होगा, जहां होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे की पूरी जानकारी मिलेगी। 

थारू संस्कृति और स्थानीय कौशल को पर्यटन से जोड़ने की पहल

दुधवा क्षेत्र में पर्यटन के साथ स्थानीय थारू संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में व्यापक पहल की जा रही है। इसके तहत पर्यटकों को पारंपरिक थारू थाली के साथ-साथ मोटे अनाज से बने पारंपरिक व्यंजन “श्री अन्न थाली” द्वारा परोसने की व्यवस्था की जाएगी, जिससे स्थानीय खान-पान को नई पहचान मिल सके। पर्यटन गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी को देखते हुए, चूंकि अधिकांश होम-स्टे संचालक महिलाएं हैं, इसलिए उन्हें होम-स्टे संचालन, डिजिटल भुगतान (यूपीआई), अतिथियों के साथ संवाद, स्टोरी टेलिंग और व्यावहारिक आतिथ्य प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। थारू समाज के लोगों को पारंपरिक भोजन, हस्तशिल्प और आतिथ्य सत्कार से जुड़ा विशेष प्रशिक्षण देने की योजना है। थारू शिल्प के विपणन को बढ़ावा देने के लिए होटलों और पर्यटन केंद्रों के माध्यम से उनके उत्पादों की बिक्री और प्रदर्शन सुनिश्चित किया जाएगा। कौशल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत करीब 150 स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। 

सामुदायिक भागीदारी पर बल- मंत्री

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच जंगलों, वेटलैंड्स, झीलों और वन्यजीव क्षेत्रों में 44 इको टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। इनमें दुधवा, पीलीभीत, रानीपुर और कतर्नियाघाट टाइगर रिजर्व के साथ-साथ हैदरपुर, बखिरा, सुर सरोवर, समसपुर और नवाबगंज जैसे प्रमुख वेटलैंड्स में खास निवेश किया गया है। उन्होंने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की संख्या 2022 में करीब 1.2 लाख से बढ़कर 2025 में लगभग 2.1 लाख के करीब हो गई है, जिनमें 70,000 से 85,000 लोग सफारी में शामिल हुए। साथ ही, सामुदायिक भागीदारी के तहत 53 जिलों में 57 क्यूरेटेड ट्रिप आयोजित की गईं, जिनमें करीब 3,000 छात्र जुड़े, जबकि पीलीभीत, दुधवा और कतर्नियाघाट में 143 स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया गया।’

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