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डॉक्टर की चेतावनी: सर्दियों में गर्भवती महिलाएं इन गलतियों से रहें दूर, वरना बढ़ सकता है रिस्क

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जैसे ही सर्दी का मौसम शुरू होता है शहर के अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं से जुड़ी एक नई स्वास्थ्य चुनौती बढ़ने लगती है। डॉक्टरों का दावा है कि पिछले कुछ दिनों में गर्भवती महिलाओं में सर्दी, खांसी, कमजोरी और ब्लड (खून) की कमी के मामले तेज़ी से सामने आ रहे हैं। यह स्थिति उन महिलाओं के लिए ज़्यादा चिंताजनक है जो पहली बार मां बनने जा रही हैं और जिन्हें इस मौसम में ज़रूरी सावधानियों की सही जानकारी नहीं है।

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डॉक्टर के अनुसार सर्दियों में गर्भवती महिलाओं का शरीर सामान्य महिलाओं से बिल्कुल अलग तरह से काम करता है। उनके शरीर को अतिरिक्त गर्माहट, ज़्यादा पोषण और संक्रमण से सुरक्षा की अधिक ज़रूरत होती है। ठंड में तापमान गिरते ही शरीर का ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होने लगता है। गर्भावस्था में शरीर पहले ही दोहरी जिम्मेदारी निभा रहा होता है। हार्मोनल बदलाव तेज़ी से होने के कारण उनका इम्यून सिस्टम सामान्य महिलाओं के मुकाबले कमजोर हो जाता है।

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ऐसे में हल्की सर्दी, गले में खराश या किसी भी तरह का संक्रमण मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों पर सीधा प्रभाव डालता है। डॉ. यादव का कहना है कि दिक्कत तब बढ़ती है जब महिलाएं समय पर जांच नहीं करवातीं या इंटरनेट पर मिलने वाली अधूरी सलाह का पालन करने लगती हैं।

कौन सी 2 गलतियां बढ़ाती हैं रातों-रात परेशानी?
डॉक्टरों ने दो बड़ी गलतियों की पहचान की है जो सर्दियों में गर्भवती महिलाओं की मुश्किलें रातों-रात बढ़ा सकती हैं:

1. सबसे बड़ी गलती: ठंड में कम पानी पीना
सर्दियों में प्यास कम लगना आम है और यही वजह है कि अधिकतर गर्भवती महिलाएं पानी पीने को लेकर लापरवाह हो जाती हैं। डॉ. यादव बताते हैं कि यही एक गलती शरीर में कमजोरी, कब्ज (Constipation), सिरदर्द, चक्कर और यूरीन इंफेक्शन (UTI) तक का कारण बन सकती है। शरीर को हाइड्रेटेड और गर्म रखने के लिए गुनगुना पानी, हर्बल चाय, सूप और नारियल पानी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं।

2. ठंडी चीजें खाना
गर्भावस्था में यह सोचना कि आइसक्रीम या ठंडा पानी पीने से कुछ नहीं होगा बेहद खतरनाक हो सकता है। ठंडी चीजें गले में खराश, सर्दी, खांसी और फेफड़ों में संक्रमण की वजह बन सकती हैं। यदि ठंडे मौसम में मां के शरीर का तापमान गिरता है तो गर्भ में पल रहे शिशु तक ब्लड सप्लाई भी प्रभावित होती है।

खून की कमी (एनीमिया) के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?

डॉ. यादव के अनुसार जिले में गर्भवती महिलाओं में खून की कमी के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। इसके मुख्य कारण हैं:

गलत खान-पान और नियमित चेकअप न करवाना।

आयरन और कैल्शियम की दवाओं को बीच में छोड़ देना।

ठंड में बाहर न निकलने और शारीरिक गतिविधि कम करने की आदत।

वे कहते हैं कि जो महिलाएं पहले से कमजोर होती हैं सर्दियों में उनकी कमजोरी दोगुनी हो जाती है इसलिए उन्हें अतिरिक्त पोषण और नियमित डॉक्टरी सलाह लेना बेहद ज़रूरी है।

 

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