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मध्यप्रदेशराज्य

मप्र में जनजाति वर्गों को मिल रही गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं

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जेईई और नीट में हुआ चयन, मप्र देश में दूसरे स्थान पर

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भोपाल
मध्यप्रदेश में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय स्कूल के जनजातीय विद्यार्थियों ने जेईई और नीट जैसी कठिन परीक्षाएं उत्तीर्ण कर मध्यप्रदेश को देश की रैंकिंग में दूसरे स्थान पर ला दिया है।

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वर्ष 2024-25 में मध्यप्रदेश से जेईई मेंस में 51 विद्यार्थियों, जेईई एडवांस्ड में 10 और नीट में 115 विद्यार्थियों ने परीक्षा पास की। इससे देश में मध्यप्रदेश का स्थान दूसरे नंबर पर आ गया है। वर्ष 2022-23 तक इन परीक्षाओं में विद्यार्थियों के पास होने का आंकड़ा मात्र 2 था। स्पष्ट है कि शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई से अब इन शालाओं से ज्यादा से ज्यादा बच्चे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में पास हो रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय आदिवासी कार्य मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश में 63 एकलव्य आदर्श आवासीय स्कूल संचालित है। देश में ऐसे 485 स्कूल है। छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा 75 और तीसरे नंबर पर झारखंड में 51 स्कूल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय बहुल क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार के निर्देश दिए है। मध्यप्रदेश में शैक्षणिक सुविधाएं लगातार बढ़ रही हैं। जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा शैक्षणिक सुविधाएं मिल रही है। प्रदेश में 34,557 शैक्षणिक संस्थाएं हैं। इनमें प्राथमिक शालाओं की संख्या 12913, माध्यमिक शाला 6788, हाई स्कूल 788, 1109, उच्चतर माध्यमिक शाला 804, सांदीपनी विद्यालय 94, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय 63, माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिषद 82, आदर्श आवासीय विद्यालय 8, छात्रावास 1593, आश्रम 1078 और क्रीड़ा परिषद 25 शामिल है।

अनुसूचित जनजाति वर्ग के कल्याण के लिए 2025-26 में 47296 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है जो पिछले बजट की तुलना में 15.91% ज्यादा है।

शैक्षणिक और प्रशासनिक संवर्ग सहित 4600 पदों की पूर्ति की जा रही है। जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को अध्ययन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य 139422 विद्यार्थियों को छात्रावास और आश्रम शालाओं में प्रवेश देकर 94% सीट क्षमता का उपयोग किया गया है।

जनजाति वर्ग में सिकल सेल एनीमिया की समस्या पर नियंत्रण के लिए विभाग की संस्थाओं और छात्रावास में पढ़ रहे विद्यार्थियों के सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग निरंतर की जा रही है। अभी तक कुल 1,11,744 विद्यार्थियों की जांच की जा चुकी है।

विद्यार्थियों को निरंतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित महाविद्यालय छात्रावास में मेस संचालन के लिए 10 माह के स्थान पर 12 माह की शिष्यवृत्ति स्वीकृत की गई है। इन समुदायों के युवाओं को रोजगारमूलक प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देने के उद्देश्य में 10 परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र की स्वीकृति भारत सरकार से मिल गई है।

भारत दर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत 125 छात्र एवं 126 छात्राओं को लाभान्वित किया गया है। इस साल 300 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। विभाग द्वारा अनुबंधित नॉलेज पार्टनर संस्थाओं से जनजातीय कार्य विभाग की शैक्षणिक संस्थानों सांदीपनि आवासीय विद्यालयों में जीवन कौशल प्रशिक्षण एवं फंडामेंटल लिटरेसी-न्यूमैरेसी के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति के माध्यम से एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में 1806 शैक्षणिक स्टॉफ और 40 प्राचार्य की नियुक्ति की गई है। आकांक्षा योजना के अंतर्गत 841 मेधावी विद्यार्थियों को जेईई और नीट कोचिंग दी जा रही है।

सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले जनजाति वर्ग के 1000 विद्यार्थियों को सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 2 करोड़ के प्रावधान राशि वितरित की गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 5 संभागों में परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र निर्माण को भारत सरकार ने मंजूरी दे दी है।

 

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