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धौरहरा वनरेंज के रामलोक जालिम नगर पुल पर खुली अवैध वसूली की दुकान..!!

लखीमपुर खीरी से शरीफ अंसारी की रिपोर्ट

राम लोक जालिम नगर पुल पर स्थित बैरियर पर एक बार फिर शुरू हुई अवैध वसूली का खेल, जानें पूरा मामला

आखिर कैसे होती है आने-जाने वाली लकड़ी व मछली की गाड़ियों से अवैध कमाई…!!

लखीमपुर-खीरी।धौरहरा वन विभाग के अंतर्गत आने वाले राम लोक जालिम नगर में भ्रष्टाचार की दुकान खुले होने की जानकारी सूत्रों से मिली है, जहां रेंजर साहब के ड्राइवर दिनेश उपाध्याय व वाचर अरूण सिंह बहराइच रोड से आने व जाने वाले लकड़ी के पटियाला व डीसीएम समेत वाहनों से रात में 1,000 से लेकर 4,000 रूपए की अवैध वसूली की जा रही है हालांकि आरोप हैं कि बिना किसी उचित निरीक्षण या मुआयना किए ही धन उगाही की जाती है।

                 जानकार सूत्रों की माने तो नियमों को दरकिनार करते हुए 1000 से लगाकर 4000 रूपए प्रति लड़की व मछली  

की गाड़ियों से लेन-देन हो रहा है।

हालांकि यह अवैध वसूली की प्रक्रिया धौरहरा रेंजर साहब की सरपरस्ती में बिना किसी विधिवत जांच-पड़ताल के पूरी की जा रही है जिससे वन क्षेत्र के नियमों का खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है।

        चौंकाने वाली बात यह है कि गत माह पूर्व धौरहरा रेंजर के ड्राइवर साहब दिनेश उपाध्याय जी बहराइच से आने वाली डीसीएम से कानूनी दांव-पेंच की धौंस दिखाकर 37,500 रुपए की मोटी रकम वसूल ली थी हालांकि मामला तूल पकड़ने पर रेंजर साहब ने गुप-चुप तरीके से डीसीएम मालिक को पैसा वापस करा दिया था हालांकि सूत्रों की मानें तो बहराइच रोड पर स्थित रामलोक जालिम नगर पुल बैरियर पर कीमती लड़की व मछली वाली गाड़ियों से होने वाली गाढी कमाई अकेले रेंजर साहब के ड्राइवर दिनेश उपाध्याय व वाचर अरूण सिंह की जेब मे जाता या फिर धौरहरा वन क्षेत्राधिकारी के पास हालांकि यह निष्पक्ष जांच का विषय है।

               अब सवाल यह उठता है कि जिम्मेदारों की सरपरस्ती में बहराइच रोड पर स्थित रामलोक जालिम नगर पुल पर बैरियर पर रात में अपने ड्राइवर व वाचर से अवैध वसूली करवाकर, उन्हें रिश्वत के लेन-देन का हिस्सा बनाया जा रहा है, जो पूरी विभागीय व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।

          हालांकि वन विभाग के जिम्मेदार इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि आम जनता व राहगीर इस अवैध वसूली के खिलाफ दबी जुबान में कड़ा विरोध जताया है। 

              स्थानीय जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे वन संपदा और प्राकृतिक संसाधनों को गंभीर नुकसान हो सकता है।

वन विभाग से जुड़े इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की गई है और धौरहरा वन विभाग के इस तरह के कृत्य से क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं अब देखने वाली बात यह होगी कि विभागीय जिम्मेदार इस अवैध वसूली पर क्या एक्शन लेते है यह समय ही बताएगा या फिर जांच के नाम पर उक्त वसूली करवाने वाले व वसूली एजेंटों को अभयदान दिया जाएगा….!!

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