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उत्तर प्रदेशलखीमपुर खीरी

उमरिया गांव लगा निक्षय शिविर, डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने किया निरीक्षण, परखी व्यवस्थाएं

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अफजल अली लखीमपुर खीरी जिला ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट

डीएम ने ली मेडिकल टीम से जानकारी, दिए निर्देश निक्षय शिविर में संभावित टीबी के मरीजों की हुई जांच

शिविर में ग्रामीणों ने बनवाए आयुष्मान गोल्डन व आभा कार्ड

लखीमपुर खीरी। सौ दिवसीय टीबी पहचान व उपचार अभियान के तहत ब्लॉक नकहा, ग्राम उमरिया के प्राथमिक विद्यालय परिसर में आयोजित निक्षय शिविर का डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता संग निरीक्षण किया। ग्रामीणों से संवाद किया। हेल्थ टीम ने ग्रामवासियों के स्वास्थ्य जांच के साथ टीबी की जांच की व शंकाप्रद टीबी मरीजों के बलगम का सैंपल लिया। इस दौरान पीडी एसएन चौरसिया, बीडीओ प्रदीप कुमार चौधरी, अधीक्षक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डॉ रामू वर्मा मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान डीएम ने मेडिकल ऑफिसर से जाना कि अब तक कितने लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण, स्क्रीनिंग, जांच हेतु सैंपल लेकर जरूरी औषधीय प्रदान की गई। चिकित्सा टीम को निर्देश दिए कि औषधियो के साथ-साथ जागरूकता पोस्टर को भी वितरित करें। निरीक्षण के दौरान चिकित्सा टीम ग्रामीणों के आयुष्मान कार्ड, आभा कार्ड बनाते मिले। वही हाईरिस्क के लोगों की टीबी जांच, नॉन कम्युनिकेबल डिसीज मुख्यतः उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) तथा डायबिटीज की जांच भी की जाती मिली। ग्राम प्रधान को निर्देशित किया कि कोई भी व्यक्ति मेडिकल स्क्रीनिंग से वंचित नहीं रहने पाए।

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जिले में चौबीस मार्च तक चलेगा सौ दिवसीय निक्षय शिविर का आयोजन : डीएम

शिविर में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा कि यह अभियान और निक्षय शिविर प्रदेश एवं जिले को टीबी मुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आइए हम सभी पूर्ण समर्पण से इसे सफल बनाने के लिए अपना योगदान दें। इस अभियान का उद्देश्य रोगी की स्क्रीनिंग, जांच के साथ उचित उपचार प्रदान करना है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत सात दिसंबर से चौबीस मार्च तक सौ दिवसीय निक्षय शिविर का आयोजन किया जा रहा है।

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डीएम बोली, टीबी रोगियों को निक्षय पोषण योजना से मिलेगे एक हजार रुपये प्रति माह

डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा कि इस अभियान के अंतर्गत समुदाय में छूटे हुए टीबी के मामलों को जल्दी से पहचानना है ताकि संक्रमण का प्रसार रोका जा सके और गांव व समुदायों को जल्द से जल्द टीबी मुक्त बनाया जा सके। साथ ही अगर कोई व्यक्ति जांच के दौरान टीबी का मरीज पाया जाता है तो उसे निक्षय पोषण योजना अंतर्गत एक हजार रुपये प्रति माह भी दिए जाते हैं ताकि वह समुदाय स्तर पर कुछ पौष्टिक आहार खरीद कर सेवन कर सके। वही सरकार की ओर से जांचे और औषधियां निशुल्क प्रदान की जाती हैं।

सीएमओ ने बताई अभियान की आवश्यकता और प्रासंगिकता

सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता ने अभियान की आवश्यकता एवं प्रासंगिकता बताते हुए कहा कि इस अभियान के तहत उन कमजोर लोगों तक पहुंचा जाएगा जो कुपोषण, एचआईवी, डायबिटीज ,धूम्रपान, शराब का सेवन या टीबी रोगियों के संपर्क में होने जैसे कारणों से टीबी के सक्रिय रोगी हो सकते हैं। यदि वह लोग समय पर स्वास्थ्य सेवाओं तक नहीं पहुंचते तो बीमारी फैलने के साथ-साथ उनकी हालत भी गंभीर हो सकती है।

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