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मध्यप्रदेशमैहर

मैहर में PHE विभाग के रवैये पर उठे सवाल, शिकायतकर्ता की अपील अतिक्रमण हटाइए, आरोप मत लगाइए

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मैहर से विकास सोनी जिला ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट

मैहर/घुनवारा। शासकीय संपत्ति की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। घुनवारा निवासी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुशवाहा ने शासकीय जलस्रोतों पर हो रहे अतिक्रमण की शिकायत कलेक्टर मैहर से की थी। उम्मीद थी कि विभाग अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेगा, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग ने कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ता पर ही सबमर्सिबल पंप निकालने का आरोप लगा दिया।

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विभाग की कार्यवाही पर सवाल आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में विभाग यह स्पष्ट नहीं कर सका कि अब तक अतिक्रमण हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए। उल्टा शिकायतकर्ता पर आरोप लगाकर मामले को दबाने की कोशिश की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह विभागीय लापरवाही का उदाहरण है और इससे भू-माफियाओं को बढ़ावा मिलेगा।
शिकायतकर्ता का पक्ष
शिकायतकर्ता अनिल कुशवाहा ने कहा
मैं कोई मोटर निकालने वाला नहीं हूँ, बल्कि एक साधारण ग्रामीण हूँ। मैंने सरकारी संपत्ति बचाने की नीयत से कलेक्टर मैहर को आवेदन दिया था। विभाग ने जांच से बचने के लिए मुझ पर झूठे आरोप लगाए हैं।गलत तरीके से सरकारी कुर्सी में बैठ ग्रामीणों को धमका कर हस्ताक्षर करवा गलत रिपोर्ट पेश किया गया है अगर यही रवैया रहा तो अतिक्रमण और बढ़ेगा तथा शासन को करोड़ों रुपये की क्षति होगी।”

उन्होंने यह भी मांग की कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सार्वजनिक की जाए।
सरकारी संपत्ति बचाने ठोस कदम उठाए जाएं। विभाग शिकायतकर्ताओं पर झूठे आरोप लगाना बंद करे। दोषी अधिकारी-कर्मचारियों पर उच्चस्तरीय जांच व सख्त कार्रवाई हो।

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पंचायत ने भी पुष्टि की
अनिल कुशवाहा के मुताबिक, घुनवारा पंचायत ने नल जल के सत्यापित प्रति उपलब्ध कराते हुए यह स्वीकार किया है कि शासकीय बोरबेल पर अतिक्रमण कर निजी भूमि में है बताकर मकान के अंदर कर लिया गया है।शिकायतकर्ता का आरोप अगर बोरवेल जनहित से बाहर और उसमें निजी कब्जा हुआ तो जिम्मेदार सरकारी कर्मचारी से जिम्मेदार तय कर उसमें लगी लागत का पूरा खर्चा प्रशासन को वसूलना चाहिए जांच कर कार्यवाही करने के बजाय विभाग ने शिकायतकर्ता को ही कटघरे में खड़ा कर दिया।
सबसे बड़ा सवाल
क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जांच से बचने के लिए आरोप लगाकर मामले को दबाना चाहता है?अगर अधिकारी ही जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते रहे तो शासन की अरबों की संपत्ति भू-माफियाओं की भेंट चढ़ने से कौन बचाएगा?
कलेक्टर से अपील-शिकायतकर्ता ने कलेक्टर महोदया से अपील की है कि
जिले भर के शासकीय जलस्रोतों और शासकीय संपत्तियों पर पहला अधिकार शासन का है। प्रशासन को अतिक्रमण मुक्त मध्यप्रदेश अभियान के तहत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। आरटीआई कार्यकर्ताओं पर झूठे आरोप लगाकर उनकी आवाज दबाना दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय नहीं हुई तो शासकीय संपत्ति की सुरक्षा असंभव हो जाएगी।
निष्कर्ष
यह मामला अब जिले में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि जब सरकारी संपत्ति बचाने वाले ही दोषी ठहराए जाएंगे, तो फिर भ्रष्टाचार और अतिक्रमण के खिलाफ आवाज कौन उठाएगा?

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