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गरियाबंदछत्तीसगढ़

किसानों को नहीं मिल रही हैं पर्याप्त खाद, पिछले साल कि तुलना में अब तक 50 प्रतिशत ही भंडारण….

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गरियाबंद से विपिन कुमार सोनवानी जिला ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट

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देवभोग विकास खण्ड के करीब 23 हजार किसान 25 हजार हैक्टर कृषि भूमि में कर रहे है कृषि

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देवभोग न्यूज…. देवभोग ब्लॉक के किसानों को समुचित मात्रा में खाद नहीं मिलने पर काफी ज्यादा नाराजगी देखने को मिल रही है अब क्षेत्र के किसान कलेक्टर भगवान सिंह उईके से मिलकर पर्याप्त खाद कि समस्या के बारे जल्द अवगत कराने वाले हैं।
बता दें पिछले साल कि तुलना में अभी तक देवभोग क्षेत्र में 50 प्रतिशत खाद का भंडारण हुआ है जिसके चलते किसानों को जितनी खाद कि जरूरत है वह नहीं मिल पा रहीं है। आलम यह हैं कि किसान निजी दुकानदारों से अधिक दामों में खरीदने के लिए मजबूर हैं। सरकारी आंकड़े कि बात करें तो पिछले साल देवभोग ब्लॉक अंतर्गत 2681.45 टन खाद का भंडारण हुआ था जिसके बाद भी किसानों को निजी दुकानदारों से तय मूल्य से अधिक दामों पर खाद खरीदना पड़ा था लेकिन अभी तक कुल 1768. टन खाद का भंडारण हो पाया है जिसके कारण किसान सोसायटी में परमिट कटाने के बाद भी खाद के लिए चक्कर काट रहें है। यहीं हाल रहा तो किसानों को खाद के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ सकती है। वहीं बिज के भंडारण भी पीछले साल कि तुलना में कम हुआ है। पिछले सत्र 4545 क्विंटल का भंडारण हुआ था अभी वर्तमान में बीज का भंडारण 2642 क्विंटल ही हो पाया है। लगभग 50 प्रतिशत बिज का भंडारण होने से क्षेत्र में मुनाफाखोरी चल रहीं हैं यहां के दुकानदार आधिकारी से तगड़ी सेटिंग बनाकर उसे तय मूल्य से अधिक दामों पर किसानों को बेच रहें है और इसके बदले विभागीय अधिकारी कमिशन ले रहें है।

देवभोग क्षेत्र में करीब 23 हजार किसान 25 हजार हैक्टर कृषि भूमि में धान कि खेती कर रहें हैं। और सरकार कि तय मापदंड के अनुसार एक हैक्टर में करीब दो क्विंटल से अधिक खाद किसानों के लिए निर्धारित है। लेकिन किसानों को इस रेसियो से भी नहीं मिल पा रहा हैं खाद।

सोसायटी में होती है खाद कि कालाबाजारी… सोसायटी में होने वाले खाद कि कालाबाजारी के चलते भी किसानों को खाद नहीं मिल पाती जिसके चलते किसान सोसायटी के चक्कर काटते हैं। यहां किसानों से फिंगर प्रिंट तो ले लेते हैं लेकिन खाद किसानों को नहीं मिलता उसे अधिक दामों पर बेचा जाता है और किसानों को खाद का भंडारण कम बताकर गुमराह किया जाता है।

इस संबंध में विपणन आधिकारी अमित चंद्राकर से जानकारी लेनी चाही तो कुछ भी बोलने से बचते फिरे इस से अंदेशा जताया जा सकता है कि सरकारी कि इस योजना को विभागीय अधिकारी के द्वारा धरातल में सही तरह से क्रियान्वयन नहीं करने के चलते किसानों को खाद बीज मिलने का होता है वह तय मापदंड अनुरूप नहीं मिल पाता जिसके चलते किसान दुकानदारों से अधिक दामों में खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

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