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छत्तीसगढ़भटगांवसारंगढ़ - बिलाईगढ़

तहसीलदार के स्थगन आदेश की खुलेआम अवहेलना

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यथास्थिति आदेश को ठेंगा दिखाकर धड़ल्ले से जारी निर्माण कार्य

प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

बिलाईगढ़ (सारंगढ़–बिलाईगढ़)।
भटगांव तहसील क्षेत्र से न्यायालयीन आदेश की अवहेलना और प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। न्यायालय तहसीलदार भटगांव द्वारा स्पष्ट स्थगन आदेश जारी किए जाने के बावजूद संवरा समाज द्वारा विवादित भूमि पर धड़ल्ले से भवन निर्माण कार्य जारी रखा गया है। यह स्थिति न केवल कानून की अवमानना को दर्शाती है, बल्कि प्रशासन की निष्क्रियता और निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रही है।

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स्थगन आदेश के बावजूद जारी निर्माण

तहसीलदार भटगांव, जिला सारंगढ़–बिलाईगढ़ द्वारा आदेश क्रमांक 223/तह./वा./2025 दिनांक 04.12.2025 के अंतर्गत संवरा समाज के उपाध्यक्ष रामकुमार पिता घरमू द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य पर अंतरिम आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके, आदेश की खुलेआम अवहेलना करते हुए निर्माण कार्य लगातार जारी है।

क्या है पूरा मामला

आवेदक परमेश्वर प्रसाद पिता जोहन, जाति चंद्रनाहू, निवासी भटगांव ने तहसीलदार न्यायालय में प्रस्तुत आवेदन में बताया कि ग्राम भटगांव स्थित भूमि खसरा नंबर 3063/9, 3063/13 एवं 3063/5 (कुल रकबा 0.085 हेक्टेयर) विधिवत उनके नाम दर्ज है। आवेदक द्वारा अपनी भूमि के रोड की ओर पत्थर की दीवार का निर्माण कराया गया था।

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आरोप है कि अनावेदक रामकुमार पिता घरमू, उपाध्यक्ष संवरा समाज, द्वारा उक्त दीवार को तोड़कर अवैध रूप से नींव खुदाई कर भवन निर्माण प्रारंभ कर दिया गया। इस पर आवेदक ने न्यायालय से निर्माण पर रोक एवं अनावेदक को बेदखल किए जाने की मांग की थी।

संवरा समाज का पक्ष

संवरा समाज के उपाध्यक्ष रामकुमार द्वारा दिनांक 08.12.2025 को न्यायालय में प्रस्तुत जवाब में कहा गया कि—

1. स्थगन आदेश खसरा नंबर 3065/1 एवं 3066/1 (रकबा 1.008 हेक्टेयर) पर लागू किया गया है, जबकि समाज द्वारा शासन से आबंटित भूमि पर ही केवल 30×30 फीट क्षेत्र में निर्माण किया जा रहा है।


2. अतिरिक्त भूमि पर किसी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा रहा है।


3. उनके द्वारा कोई अवैध निर्माण कार्य नहीं कराया जा रहा है।



अतः स्थगन आदेश को निरस्त किए जाने की मांग की गई है।

धमकी और दबाव के आरोप

आवेदक का आरोप है कि संवरा समाज को शासन द्वारा मात्र 2 डिसमिल भूमि अन्यत्र आबंटित की गई थी, इसके बावजूद उनकी निजी भूमि के सामने लगभग 8 डिसमिल भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण किया जा रहा है।
इतना ही नहीं, विरोध करने पर यह कहते हुए धमकाया जा रहा है कि “मुख्यमंत्री का निज सहायक हमारा खास आदमी है, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता” तथा झूठे प्रकरण में फंसाने की धमकी भी दी जा रही है।

पटवारी जांच में भी खुली गड़बड़ी

हल्का नंबर 5 के पटवारी द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि विवादित भूमि शासकीय खसरा नंबर 3065/1 एवं 3066/1 (घास मद) में दर्ज है।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संवरा समाज को केवल 30×30 फीट भूमि आबंटित बताई जा रही है, जबकि मौके पर 65×54 फीट क्षेत्र में निर्माण कार्य किया जा रहा है, जो आबंटन नियमों के विरुद्ध है।

कार्रवाई शून्य, सवाल बरकरार

सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि न्यायालयीन आदेश के स्पष्ट उल्लंघन के बावजूद अब तक कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है। संवाददाता द्वारा तहसीलदार भटगांव के मोबाइल नंबर पर लगातार संपर्क का प्रयास किया गया, किंतु कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

मामले से एसडीएम बिलाईगढ़ को अवगत कराए जाने पर उन्होंने तहसीलदार से चर्चा की बात कही, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई प्रभावी कदम उठाया जाना दिखाई नहीं दे रहा है।

प्रशासन की भूमिका कटघरे में

न्यायालयीन आदेश के बावजूद निर्माण कार्य का जारी रहना प्रशासनिक निष्क्रियता या संभावित संरक्षण की ओर संकेत करता है। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला बड़े कानूनी टकराव और कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति को जन्म दे सकता है।

अब देखना यह है कि प्रशासन कानून की गरिमा बनाए रखता है या प्रभावशाली लोगों के आगे कानून एक बार फिर बेबस नजर आता है।

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