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मध्यप्रदेशराज्य

पुलिस के गलत रवैये पर मध्य प्रदेश HC का सख्त कदम, 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड, गृह विभाग के प्रमुख सचिव तलब

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इंदौर

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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पुलिस के काम करने के तरीके पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने अफीम तस्करी के मामले में बीएनएसएस के प्रावधानों का पुलिस द्वारा पालन नहीं किए जाने पर गृह विभाग के प्रमुख सचिव को तलब किया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि लगता है कि राज्य के अधिकारियों ने इन प्रावधानों को भुला दिया है।

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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने तलाशी और जब्ती की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर बीएनएसएस के प्रावधानों का राज्य पुलिस द्वारा पालन नहीं किए जाने पर नाराजगी जताते हुए गृह विभाग के प्रमुख सचिव को तलब किया है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने यह टिप्पणी सूबे के मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ थाना क्षेत्र में 18 साल के युवक को 2.71 किलोग्राम अफीम की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के मामले में की।

युवक ने हाई कोर्ट की शरण लेते हुए दावा किया है कि उसे इस मामले में फंसाया गया है। अदालत द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद एक थाना प्रभारी समेत छह पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इन पुलिस कर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने मामले की जांच के दौरान तय प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया।

हाई कोर्ट की एकल पीठ ने बीएनएसएस की धारा 105 और धारा 185 का हवाला देते हुए कहा कि इन प्रावधानों से विधायिका ने ऑडियो-वीडियो माध्यम से तलाशी और जब्ती को रिकॉर्ड करने की जरूरत को ध्यान में रखा है। ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य के अधिकारियों द्वारा इन प्रावधानों को आसानी से भुला दिया गया है।

हाई कोर्ट ने मामले में नौ दिसंबर को हुई सुनवाई के आधार पर पारित आदेश में कहा कि ऐसी परिस्थितियों में गृह विभाग के प्रमुख सचिव/ प्रतिवादी राज्य को उपरोक्त प्रावधानों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में इस अदालत को अवगत कराने का निर्देश दिया जाता है।

कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 12 जनवरी 2026 की तारीख तय की है। हाई कोर्ट ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव को इस तारीख को अदालत के सामने हाजिर होने को कहा है। एकल पीठ ने राज्य सरकार को यह बताने का निर्देश भी दिया है कि क्या उसने पुलिस कर्मियों को शरीर पर पहने जाने वाले कैमरे उपलब्ध कराने पर कोई विचार किया है?

हाई कोर्ट ने अफीम तस्करी के आरोप में एनडीपीएस अधिनियम के तहत गिरफ्तार युवक को पांच दिसंबर को अंतरिम जमानत पर रिहा किए जाने का आदेश दिया था। राजस्थान के निवासी युवक की ओर से अदालत में अपने बचाव में दावा किया गया है कि उसे पुलिस कर्मियों ने एक अंतरराज्यीय यात्री बस में 29 अगस्त की सुबह 11:15 बजे के आस-पास अवैध तौर पर पकड़ा। जबकि दस्तावेजों में उसकी इस तारीख को शाम 5:15 बजे गिरफ्तारी दिखाई गई।

आरोपी के वकील हिमांशु ठाकुर ने पीटीआई-भाषा से कहा कि मेरा मुवक्किल इस बस से मध्य प्रदेश के मंदसौर से राजस्थान के प्रतापगढ़ जा रहा था। वह एक मेधावी छात्र है और उसने 12वीं की परीक्षा फर्स्ट डिविजन से पास की है। ठाकुर ने बताया कि हाई कोर्ट में उनके मुवक्किल की ओर से यात्री बस के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज भी पेश किया गया है, जिसका अदालत पहले ही संज्ञान ले चुकी है। इस फुटेज में सादे कपड़े पहने तीन लोग युवक को बस से बाहर ले जाते दिखाई दे रहे हैं।

राजस्थान से सटा मंदसौर जिला अफीम की खेती के लिए मशहूर है। जिले में मादक पदार्थों के अवैध उत्पादन, भण्डारण, कारोबार और तस्करी के मामले लगातार सामने आते हैं।

 

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