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मध्यप्रदेशराज्य

MP सिविल जज भर्ती विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, चयन प्रक्रिया संशोधित करने और नई सूची जारी करने के निर्देश

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जबलपुर
 मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
ने सिविल जज जूनियर डिवीजन  भर्ती परीक्षा-2022 के परिणाम पर बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) अभ्यर्थियों के चयन पर पुनर्विचार किया जाए। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकल पीठ ने “एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस” की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। 

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याचिका में भर्ती के नियम 194 में संशोधन को चुनौती दी गई थी। दरअसल, सिविल जज भर्ती-2022 में कुल 199 पदों के लिए विज्ञापन निकला था, जिसमें बैकलॉग के पद भी शामिल थे। इसमें अनारक्षित वर्ग: 48 में से 17 बैकलॉग,  SC: 18 में से 11 बैकलॉग , ST: 121 में से 109 बैकलॉग ,  OBC: 10 में से 1 बैकलॉग है। 

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वहीं हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मुख्य परीक्षा में एससी उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 45% और एसटी के लिए 40% अंक मानें जाएं. वहीं इंटरव्यू में भी 20 अंकों की बाध्यता में राहत देने के निर्देश दिए गए हैं. कोर्ट का कहना है कि पात्र उम्मीदवारों को मौका देना न्याय की मूल भावना है. अब एक्जाम सेल को जल्द ही नई सूची कोर्ट में पेश करनी होगी. यह फैसला कई परिवारों की उम्मीदें फिर से जगा रहा है.

मेन्स और इंटरव्यू के बाद अंतिम रूप से 89 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। हैरानी की बात यह रही कि इन 89 चयनित अभ्यर्थियों में ओबीसी वर्ग के 15 अभ्यर्थी तो शामिल थे, लेकिन SC वर्ग के केवल 3 और ST वर्ग का एक भी अभ्यर्थी जगह नहीं बना पाया। याचिकाकर्ता का कहना था कि इतनी बड़ी संख्या में बैकलॉग पद होने के बावजूद SC-ST अभ्यर्थियों का इतना कम प्रतिनिधित्व संवैधानिक आरक्षण के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े करता है। 

साथ ही नियम 194 में किए गए संशोधन को भी असंवैधानिक बताया गया। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए अंतिम निर्णय तक सुरक्षित रखा है, लेकिन फिलहाल SC-ST अभ्यर्थियों के चयन पर पुनर्विचार करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि कोई अभ्यर्थी योग्य पाया जाता है तो उसे नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाए। 

दों के खाली रहने को 'अत्यंत गंभीर' बताया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और पुष्पेंद्र शाह ने तर्क दिया कि परीक्षा सेल ने आरक्षण नीति का सही ढंग से पालन नहीं किया। बैकलॉग पदों को अनारक्षित वर्ग को देना, न्यूनतम योग्यता में छूट न देना और साक्षात्कार में कम अंक देना भेदभाव को दर्शाता है।

वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि सिविल जज परीक्षा के परिणामों में 191 पदों के बदले केवल 47 अभ्यर्थियों का चयन व्यवस्था की गंभीर त्रुटि को दर्शाता है। अजजा वर्ग के निर्धारित पदों को भरा ही नहीं जा सका। एक राज्य के तौर पर यह निराशाजनक है। सरकार वंचित वर्ग के उत्थान में पूरी तरह विफल साबित हुई है।

हम न्यायपालिका या आरक्षण पर प्रश्न नहीं उठा रहे, किंतु परिणाम बताते हैं कि आरक्षित वर्ग को आज भी सीखने और तैयारियों के संसाधन और अवसर उपलब्ध नहीं हैं। राज्य को इस बात के प्रयास बढ़ाने होंगे, जिसमें वंचित समुदाय को बेहतर अवसर मिल सकें।

लगातार हो रहा विरोध
सबसे बड़ी चिंता यह रही कि 191 सीटों में से एसटी वर्ग का एक भी उम्मीदवार चयनित नहीं हुआ, जबकि 121 सीटें एसटी वर्ग की खाली रह गईं. एससी वर्ग से भी केवल एक ही अभ्यर्थी का चयन हुआ. कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर माना. वहीं परिणाम आने के बाद दलित, आदिवासी व ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार लगातार विरोध कर रहे थे. अब संशोधित सूची आने से इस विवाद पर बड़ा असर पड़ सकता है और डिजर्विंग उम्मीदवारों को न्याय मिल सकता है.

सिलेक्शन नहीं हो पाने की एक वजह यह बताई एडवोकेट मोहर सिंह बताते हैं कि इस बार का एग्जाम काफी कठिन था। कानूनों से ज्यादा सवाल कोर्ट के जजमेंट्स से जुड़े हुए थे। इस कारण अभ्यर्थियों को जवाब देने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वैकल्पिक एग्जाम भी कठिन था, जिसके कारण कम अभ्यर्थी ही मुख्य परीक्षा तक पहुंच पाए। मुख्य परीक्षा में भी 50% अंक लाना जरूरी था। अधिकतर स्टूडेंट 50% का आंकड़ा नहीं छू पाए और पहले ही बाहर हो गए।

इस तरह का था परीक्षा पैटर्न

प्रारंभिक परीक्षा

    प्रारूपः वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्यीय प्रश्न)
    अवधि: 2 घंटे
    कुल अंकः 150 (150 प्रश्न, प्रत्येक 1 अंक का)

मुख्य परीक्षा

    प्रारूपः वर्णनात्मक (निबंध-आधारित)
    अवधिः प्रत्येक पेपर के लिए 3 घंटे
    कुल पेपर: 4
    कुल अंक: 400 (प्रत्येक पेपर 100 अंकों का)

विषय : भारत का संविधान, सिविल प्रक्रिया संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, लेखन कौशल और न्यायालयीन अभ्यास जैसे विषय शामिल थे।

अनिवार्यता : सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 200 अंक और अन्य वर्गों के लिए 190 अंक लाना जरूरी।

मौखिक साक्षात्कार

कुल अक: 50

चयनः अंतिम चयन के लिए मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के कुल अंकों को जोड़ा गया।

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