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छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपा

“डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन।”

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दीपक यादव बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट

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“भारतीय जनतापार्टी ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की जयंती मनाई।”

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सक्ती – 6 जुलाई को डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के जयंती पर भारतीय जनतापार्टी सक्ती द्वारा जिला स्तरीय संगोष्ठी एवं पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिलाध्यक्ष टिकेश्वर सिंह ग़बेल ,सहित उपस्थित अतिथियों ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित कर उनको याद किया उक्त संगोष्ठी में जिलाध्यक्ष टिकेश्वर सिंह ग़बेल सहित मंचस्थ अतिथियों ने  डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बारे में सारगर्भित बाते कही उन्होंने कहा हमारे यशस्वी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कश्मीर में धारा 370 हटाकर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को सच्ची श्रद्धांजलि दी है

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डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत के सच्चे सपूत थे भारत माता के इस सपूत का  जन्म 6 जुलाई 1901 को एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ इनके पिता आशुतोष मुखर्जी महान शिक्षाविद एवं बुद्धिजीवी थे डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने एक देश एक विधान एक प्रधान की बात कही जब देश आजाद हुआ कश्मीर में अलग ही शासन व्यवस्था थी भारत के ही लोगों को कश्मीर जाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती थी वहां अलग ही कानून चलता था श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने जिसका विरोध किया उन्होंने अपना जीवन  देश के लिए  बलिदान कर दिया  श्यामा प्रसाद मुखर्जी जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। संसद में अपने भाषण में धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की। अगस्त 1952 में जम्मू कश्मीर की विशाल रैली में उन्होंने अपना संकल्प व्यक्त किया था कि ”या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊंगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपना जीवन बलिदान कर दूंगा”। डॉ. मुखर्जी अपने संकल्प को पूरा करने के लिये 1953 में बिना परमिट लिये जम्मू-कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े। वहां पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 23 जून 1953 को जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी। जेल में उनकी मृत्यु ने देश को हिलाकर रख दिया और परमिट सिस्टम समाप्त हो गया। उन्होंने कश्मीर को लेकर एक नारा दिया था,“नहीं चलेगा एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान डॉ. मुखर्जी स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े और निर्वाचित हुए उन्हें अंतरिम सरकार में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में शामिल किया। नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली के बीच हुए समझौते के पश्चात 6 अप्रैल 1950 को उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर-संघचालक गुरु गोलवलकर जी से परामर्श लेकर श्री मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को राष्ट्रीय जनसंघ की स्थापना की। 1951-52 के आम चुनावों में राष्ट्रीय जनसंघ के तीन सांसद चुने गए जिनमें एक डॉ. मुखर्जी भी थे, डॉ. मुखर्जी भारत की अखंडता और कश्मीर के विलय के समर्थक थे।

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक दक्ष राजनीतिज्ञ, विद्वान और  महान देशभक्त थे हम  सभी भाजपा के कार्यकर्ता भारत माता के इस सच्चे सपूत को आज उनके जन्मजयंती पर याद कर उनको सादर नमन करते है उक्त कार्यक्रम में पूर्व जिला उपाध्यक्षगण  भूषण चंद्रा,संजय रामचंद्र ,वरिष्ठ भाजपा नेता रामावतार अग्रवाल जनपद अध्यक्ष कवि शरण वर्मा जिला मंत्री नेतराम चंद्रा,भुवन भास्कर यादव प्रेम पटेल, रामनरेश यादव जिला मीडिया प्रभारी धनंजय नामदेव जिला आई टी सेल अरुण शर्मा जिला पंचायत सदस्य सुश्री आशा साव,आयुष शर्मा, जिला युवामोर्चा अध्यक्ष लोकेश साहू,उपाध्यक्ष चिराग अग्रवाल दीपक गुप्ता,भोजराम साहू रितेश साहू चक्रधर साहू,दिलीप सराफ,संजय अग्रवाल ,सोनू जायसवाल ,मंडल के अध्यक्षगण अभिषेक शर्मा,पहलवान दास महंत,गेंदराम मनहर, जीवेंद्र गबेल,आशीष तिवारी, भूपेन्द्र यादव ,रोशन राठौर ,गजेंद्र राठौर ,दादू केवट राजेंद्र राठौर,विजय  जायसवाल,नटवर सिदार,सरिता सिदार,नितिन शुक्ला,पिंटू सिंघल,सुरेश साहू घनश्याम देवांगन सहित भाजपा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता  मौजूद रहे कार्यक्रम का संचालन मंडल अध्यक्ष अभिषेक शर्मा ने किया एवं जिला मंत्री नेतराम चंद्रा ने आभार व्यक्त किया

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