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छत्तीसगढ़

सिलतरा में श्रीमद भागवत कथा का भव्य समापन हजारों श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, भक्तिमय हुआ माहौल

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फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज से मोहम्मद उस्मान सैफी

सिलतरा में विगत दिनों से चल रही आचार्य श्रीयुत पं. युवराज पाण्डेय जी की श्रीमद भागवत कथा का आज अत्यंत भव्य, श्रद्धापूर्ण एवं आध्यात्मिक वातावरण में समापन हुआ। कथा के अंतिम दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति, श्रद्धा और उत्साह से सराबोर नजर आया।

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इस अवसर पर उपस्थित भावेश बघेल ने आचार्य पं. युवराज पाण्डेय जी की कथा वाचन शैली की सराहना करते हुए कहा कि “आचार्य जी की ओजस्वी वाणी, गूढ़ ज्ञान और सरल प्रस्तुति ने पूरे क्षेत्र के वातावरण को आनंदमय और भक्तिमय बना दिया है। श्रीमद भागवत कथा के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का संचार हुआ है, जो निश्चित रूप से जनमानस के लिए प्रेरणादायी है।”
उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने, आपसी भाईचारा बढ़ाने तथा नई पीढ़ी को अपने संस्कारों एवं परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं। सिलतरा में आयोजित यह कथा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि सामाजिक एकता और समरसता का भी सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।
भावेश बघेल ने इस भव्य आयोजन के सफल संचालन हेतु आयोजक महिला समूह के सभी सदस्यों को विशेष रूप से बधाई देते हुए कहा कि “महिला समूह द्वारा इतने बड़े स्तर पर अनुशासित एवं सफल आयोजन करना अत्यंत सराहनीय है। उनके समर्पण, मेहनत और सहयोग से ही यह कार्यक्रम सफल हो पाया है।”
कार्यक्रम के दौरान भावेश बघेल सहित उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों एवं कांग्रेस पदाधिकारियों ने आचार्य श्रीयुत पं. युवराज पाण्डेय जी का शॉल एवं श्रीफल भेंट कर भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आशीष वर्मा, पूर्व अध्यक्ष दुर्गेश वर्मा, मोहन साहू, संयम ठाकुर, सुरेश साहू, कमल साहू, रवि लहरी, कान्हा वर्मा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया और आयोजन की सराहना की।
समापन अवसर पर पूरे क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा एवं उल्लास का वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने कथा के माध्यम से प्राप्त संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूती प्रदान की।

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