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मनरेगा से बदली किसान की तस्वीर, कुआं बना आत्मनिर्भरता की नई राह

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मनरेगा से बदली किसान की तस्वीर, कुआं बना आत्मनिर्भरता की नई राह
हेमंत साहू ने वर्षभर खेती कर बढ़ाई आय, गांव में बने प्रेरणा स्रोत

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जांजगीर-चांपा,  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है। इसका सशक्त उदाहरण विकासखंड बम्हनीडीह के ग्राम सरवानी निवासी किसान श्री हेमंत साहू हैं, जिनके जीवन में मनरेगा के तहत बने कुएं ने बड़ा बदलाव लाया है।
पूर्व में श्री साहू पूरी तरह वर्षा आधारित खेती पर निर्भर थे। सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण वे वर्ष में केवल एक ही फसल ले पाते थे, जिससे परिवार का भरण-पोषण कठिन हो जाता था और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी।

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वर्ष 2023-24 में मनरेगा योजना के तहत उनके खेत में व्यक्तिगत कुएं का निर्माण स्वीकृत हुआ। लगभग 2.99 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस कुएं ने न केवल स्थायी सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई, बल्कि निर्माण कार्य के दौरान 357 मानव दिवस का रोजगार भी सृजित किया, जिससे स्थानीय मजदूरों को लाभ मिला।


कुएं के निर्माण के पश्चात श्री साहू ने खेती के स्वरूप में बदलाव करते हुए अब वर्षभर विभिन्न सब्जियों की खेती शुरू कर दी है। वर्तमान में वे टमाटर, बैंगन, भिंडी, पत्तागोभी, लौकी, मिर्च, करेला, खीरा एवं ककड़ी जैसी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हुआ है।
श्री हेमंत साहू का कहना है कि कुएं के निर्माण से हर मौसम में खेती संभव हो गई है, जिससे उनकी आय स्थिर हुई है और भविष्य के प्रति आत्मविश्वास भी बढ़ा है।


यह सफलता कहानी दर्शाती है कि योजनाबद्ध प्रयास, सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन और किसानों की मेहनत से ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है। मनरेगा योजना न केवल रोजगार उपलब्ध करा रही है, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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