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लोक अदालत में सुलझे पुराने विवाद, दोस्ती और परिवार के रिश्ते फिर जुड़ेजिले में 40 खंडपीठों के माध्यम से हजारों मामलों का त्वरित निपटारानेशनल लोक अदालत बनी राहत का मंच, वर्षों पुराने मामले भी सुलझे

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वर्ष 2026 की प्रथम नेशनल लोक अदालत का आयोजन, 29 हजार से अधिक मामलों का हुआ निराकरण
जांजगीर-चांपा।

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राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के आदेश तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के मार्गदर्शन में वर्ष 2026 की प्रथम नेशनल लोक अदालत का आयोजन 14 मार्च 2026 को जिला न्यायालय जांजगीर सहित समस्त तालुका न्यायालयों और राजस्व न्यायालयों में किया गया।

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जिला एवं सत्र न्यायालय जांजगीर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शक्ति सिंह राजपूत द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर न्यायाधीशगण, जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी, अधिवक्तागण, जिला प्रशासन के अधिकारी, न्यायालय के कर्मचारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी-कर्मचारी, पैरा लीगल वालेंटियर, टीसीएल महाविद्यालय के विधि छात्र-छात्राएं तथा मीडियाकर्मी उपस्थित रहे।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला न्यायाधीश ने नेशनल लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अधिक से अधिक प्रकरणों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए सहयोग करने की अपील की। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मनोज कुमार कुशवाहा ने लोक अदालत के उद्देश्य और इसकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इस नेशनल लोक अदालत में जिला न्यायालय जांजगीर, समस्त तालुका न्यायालयों एवं राजस्व न्यायालयों में कुल 40 खंडपीठों का गठन किया गया था। इनमें कुल 44,811 प्रकरण सुनवाई के लिए रखे गए, जिनमें से 29,810 प्रकरणों का सफल निराकरण किया गया। साथ ही 3 करोड़ 81 लाख 57 हजार 388 रुपये का अवार्ड पारित किया गया।
लोक अदालत की प्रेरणादायक सफल कहानियां भी सामने आईं।


एक मामले में चेक बाउंस के विवाद में उलझे दो मित्रों को न्यायालय द्वारा कृष्ण-सुदामा की पवित्र मित्रता का उदाहरण देकर समझाया गया, जिसके बाद दोनों ने आधी राशि पर समझौता कर वर्षों पुराना विवाद समाप्त कर लिया और गले मिलकर खुशी-खुशी घर लौटे।


एक अन्य मामले में एक पिता द्वारा बेटी की शादी के लिए लिया गया कर्ज चुकाने से संबंधित सात वर्ष पुराने चेक बाउंस प्रकरण का भी समाधान हुआ। न्यायालय की समझाइश के बाद परिवादी ने आधी राशि पर समझौता कर लिया और दोनों पक्षों ने आपसी विवाद समाप्त कर दिया।


इसी तरह एक सिविल प्रकरण में संपत्ति का इकरार कर पांच लाख रुपये लेने के बाद रजिस्ट्री से इनकार करने वाले मामले में भी लोक अदालत में समाधान हुआ। प्रतिवादी ने वादी को पूरी राशि लौटाकर विवाद समाप्त किया, जिससे वादी को जमा की गई कोर्ट फीस भी वापस मिल गई।


वहीं एक पारिवारिक मामले में पति-पत्नी के बीच चल रहे मतभेद भी समाप्त हो गए। नेशनल लोक अदालत में समझौते के बाद पत्नी अपने पुत्र सहित पति के साथ रहने को राजी हो गई और भरण-पोषण से संबंधित प्रकरण का भी निराकरण हो गया।


इस प्रकार नेशनल लोक अदालत ने एक बार फिर त्वरित, सरल और सौहार्दपूर्ण न्याय प्रदान करने की अपनी भूमिका को सफलतापूर्वक सिद्ध किया।

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