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नरवा विकास योजना से बदली पहाड़ी कोरवा अंचल की तस्वीरभू-जल संरक्षण के साथ रोजगार सृजन और वन्यजीव संरक्षण को मिला बढ़ावा

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नरवा विकास योजना से बदली पहाड़ी कोरवा अंचल की तस्वीर
भू-जल संरक्षण के साथ रोजगार सृजन और वन्यजीव संरक्षण को मिला बढ़ावा

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सक्ती
नरवा विकास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से पहाड़ी कोरवा बाहुल्य क्षेत्र में विकास की नई धारा प्रवाहित हुई है। छत्तीसगढ़ शासन की इस फ्लैगशिप योजना ने जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं।

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प्रकृति की गोद में बसे रैंनखोल क्षेत्र में योजना अंतर्गत व्यापक संरचनात्मक कार्य किए गए हैं। केरवार नाला में लूज बोल्डर चेक डेम, गेबियन संरचना एवं मिट्टी बांध का निर्माण कराया गया है। इन कार्यों से मृदा अपरदन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है तथा क्षेत्र में भू-जल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
योजना के माध्यम से स्थानीय ग्रामीणों को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध हुआ, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। मिट्टी में नमी की निरंतरता से नए पौधों का अंकुरण बढ़ा है और विभिन्न प्रजातियों की वनस्पतियों में वृद्धि हुई है। इससे ग्रामीणों के लिए लघु वनोपज संग्रहण के अवसर बढ़े हैं तथा आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हुए हैं।


वन क्षेत्रों के भीतर जल की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित होने से वन्यजीवों को पानी की तलाश में बाहर नहीं आना पड़ता। परिणामस्वरूप अवैध शिकार की घटनाओं में कमी आई है और किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान में भी गिरावट दर्ज की गई है।
समग्र रूप से नरवा विकास योजना ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ आजीविका संवर्धन का संतुलित मॉडल प्रस्तुत करते हुए पहाड़ी कोरवा अंचल की तस्वीर बदलने का कार्य किया है। यह योजना ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रभावी उदाहरण बनकर उभरी है।

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