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एक शिक्षक के संकल्प और नवाचार से बदली तस्वीर, उत्कृष्टता की बनी मिसाल

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सफलता की कहानी
सुदूर वनांचल से सफलता की उड़ान: बालक आश्रम मसानियाखुर्द बना प्रदेश का प्रेरणा विद्यालय
एक शिक्षक के संकल्प और नवाचार से बदली तस्वीर, उत्कृष्टता की बनी मिसाल

सक्ती जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र में पहाड़ियों की गोद में स्थित विकासखंड सक्ती अंतर्गत ग्राम मसानिया कला के आश्रित ग्राम मसानियाखुर्द का अनुसूचित जनजाति बालक आश्रम मसानियाखुर्द आज शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि का प्रतीक बन चुका है। संसाधनों की कमी और स्टाफ के अभाव से जूझ रहे इस आश्रम ने महज छह माह में जिस प्रकार अपनी पहचान बनाई है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है।

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प्रधान पाठक शैलकुमार पांडेय द्वारा कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात आश्रम की तस्वीर बदलनी शुरू हुई। एकमात्र शिक्षक के रूप में उन्होंने विभागीय निर्देशों के अनुरूप तथा अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के साथ नवाचारों को अपनाया और विद्यालय का समग्र विकास सुनिश्चित किया। परिणामस्वरूप यह आश्रम आज न केवल सक्ती जिले, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में ‘प्रेरणा विद्यालय’ के रूप में प्रतिष्ठित हो चुका है।
विद्यालय में पुस्तकालय, खिलौना घर, डिजिटल कक्षा एवं किचन गार्डन जैसी सुविधाओं का विकास कर बच्चों को व्यावहारिक एवं रचनात्मक शिक्षा से जोड़ा गया है। ‘एक छात्र – एक पेड़’ अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए परिसर को हरा-भरा एवं प्रेरणादायक बनाया गया है।


आश्रम की बढ़ती ख्याति का प्रमाण है कि अब रायगढ़, जशपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ एवं कोरबा जैसे पड़ोसी जिलों के विद्यार्थी भी यहां अध्ययन हेतु आ रहे हैं। विद्यालय की नवाचारी गतिविधियों—जैसे ‘कबाड़ से जुगाड़’ एवं प्रयोगात्मक विज्ञान शिक्षण—को देखने निजी विद्यालयों के शिक्षक एवं छात्र भी भ्रमण के लिए पहुंच रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर भी इस आश्रम को पहचान मिली है। तमिलनाडु में आयोजित ‘ग्रीन डे’ कार्यक्रम में देशभर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के बीच इस प्राथमिक स्तर के आश्रम की भागीदारी ने जिले को गौरवान्वित किया है।
विद्यालय की इस सफलता को मॉडल के रूप में अपनाते हुए ‘हुनर के झोला’ कार्यक्रम के तहत जिले के 10 अन्य विद्यालयों को भी इसी तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, समर्पण और नवाचार के माध्यम से सीमित संसाधनों में भी शिक्षा को उत्कृष्टता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
आज बालक आश्रम मसानियाखुर्द न केवल बच्चों के भविष्य को संवार रहा है, बल्कि पूरे जिले के लिए एक अनुकरणीय एवं प्रेरणास्पद मॉडल के रूप में स्थापित हो चुका है।

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