Advertisement Carousel
छत्तीसगढ़सारंगढ़सारंगढ़ - बिलाईगढ़

कलेक्टर डॉ कन्नौजे के हाथों स्कूली बच्चों ने खायी फाइलेरिया की दवा

Ad

10 से 25 फ़रवरी तक चलाया जाएगा हाथीपांव उन्मूलन अभियान

Advertisements
Advertisements

सारंगढ़ बिलाईगढ़, कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे के हाथों पीएमश्री स्कूल सारंगढ़ में विद्यार्थियों को फाइलेरिया (हाथी पांव) रोग से  बचने के लिए उनके उम्र और ऊचाई के आधार पर दवा वितरण किया गया। इस अवसर पर सीएमएचओ डॉ निराला सहित स्वास्थ्य अमला और स्कूल के शिक्षक और विद्यार्थीगण उपस्थित थे।

फाइलेरिया याने हाथीपांव की बीमारी एक परजीवी के कारण होता है जिसे मादा क्यूलेक्स मच्छर के द्वारा फैलाया जाता है। हाथीपांव की बीमारी के परजीवी जब सूक्ष्म रूप में होता है तभी उसे नष्ट कर सकते है। जवान होने की स्थिति में इसे समाप्त नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि परजीवी को नष्ट करने के लिए पूरे समुदाय को आईडीए की दवाई खिलाई जाती है। परजीवी के बड़े होने की स्थिति में मानव शरीर के लासिका तंत्र को बाधित करता है, परिणाम स्वरूप पैरों में सूजन होती है। एक बार पैर में सूजन हो जाने के बाद इसे ठीक नहीं किया जा सकता है। इसलिए फाइलेरिया होने के पहले ही जब सूक्ष्म रूप में परजीवी होता है तब उसे मारा या नष्ट किया जा सकता है। यही कारण है कि समुदाय को एक साथ दवाई खिलाई जाती है। फाइलेरिया या हाथीपांव उन्मूलन का यह अभियान 10 फ़रवरी से 25 फ़रवरी तक चलाया जाएगा।

Advertisements

आंगनवाड़ी केंद्रों, शालाओं, कार्यालयों को बूथ बनाया गया है। लक्षित व्यक्तियों को दवाई खिलाएंगे। इस दवाई को सामने ही खिलाना होता है। कई लोग बाद में खा लेंगे दवाई दे दीजिए कहकर दवा लेते हैं, लेकिन दवा नहीं खाते है जो बीमारी होने पर उनके लिए ही जिंदगी भर सहना पड़ेगा। फाइलेरिया की दवा पूर्णतः सुरक्षित है। कुछ लोगों को सिर दर्द ,बदन दर्द ,पेट में दर्द की शिकायत होती है, जो शरीर मे माइक्रोफाइलेरिया या कृमि के परजीवी होने के कारण हो सकता है। दवाई खाने के बाद परजीवी मरता है। परिणाम स्वरूप रिएक्शन होता है। ये साइड इफेक्ट दिखता है। कोई भी गोली खाने से जी मिचलाता है।  विशेष परिस्थिति के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की  रैपिड रिस्पॉन्स टीम की गठन भी की गई है। परेशानी होने पर 104 पर भी फोन करके परामर्श ली जा सकती है। बूथ में और घर में दवाई नहीं खा पाएंगे उन्हें मापअप राउंड चला कर छुटे हुए लोगों को खोज खोज कर आईडीए की दवाई खिलाई जाएगी। एलबेंडाजोल की गोली को वर्ष में 2 बार अगस्त और फरवरी में दी जाती है, लेकिन फाइलेरिया नाशक दवाई की वर्ष में एक बार ही दी जानी होती है। तीनों दवाई की कंपोजिशन इस बीमारी को नष्ट करने में सहायक है। स्कूल के बच्चो की टीएएस एक प्रकार की जांच है, जिससे पता लगाया जाता है बच्चे में फाइलेरिया के परजीवी है कि नहीं। समुदाय को फाइलेरिया रोधी दवाई खाना जरूरी हो गया है।

Ad जय मेडिकल स्टोर स्थान: भारत माता चौक बिलासपुर रोड सारंगढ़
First Chhattisgarh News Ad

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button