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संघ संगठन ने विवेक कुमार राठौर पर पुनः जताया विश्वासप्रदेश प्रवक्ता से प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर पदोन्नति, शीघ्र मिलने वाली डॉक्टरेट बनी गौरव का विषय

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संघ संगठन ने विवेक कुमार राठौर पर पुनः जताया विश्वास
प्रदेश प्रवक्ता से प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर पदोन्नति, शीघ्र मिलने वाली डॉक्टरेट बनी गौरव का विषय

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संघ संगठन के प्रति निरंतर समर्पण, अनुशासित कार्यशैली और प्रभावशाली संगठनात्मक भूमिका निभाने वाले विवेक कुमार राठौर, व्याख्याता (संस्कृत), को एक बार फिर संगठन ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। संगठन ने उनकी कार्यकुशलता, नेतृत्व क्षमता और संगठन के प्रति निष्ठा को देखते हुए उन्हें प्रदेश प्रवक्ता के बाद प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर पदोन्नत किया है। इस निर्णय से संगठन से जुड़े पदाधिकारियों, शिक्षकों एवं शुभचिंतकों में हर्ष और उत्साह का वातावरण है।


विवेक कुमार राठौर लंबे समय से शिक्षा एवं संगठन दोनों क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। संस्कृत जैसे प्राचीन और गौरवशाली विषय के व्याख्याता के रूप में उन्होंने न केवल विद्यार्थियों को शास्त्रीय ज्ञान से जोड़ा है, बल्कि शिक्षक समाज के हितों और संगठनात्मक उद्देश्यों को मजबूती से आगे बढ़ाने का भी कार्य किया है। उनकी कार्यशैली में स्पष्टता, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण सदैव परिलक्षित होता रहा है।
प्रदेश प्रवक्ता के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान राठौर जी ने संगठन की नीतियों, विचारधाराओं और कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से समाज के समक्ष प्रस्तुत किया। संवाद कौशल, विषय की गहरी समझ और तार्किक प्रस्तुति के कारण वे संगठन की आवाज़ को मजबूती देने में सफल रहे। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि उनके नेतृत्व और विचारशीलता से संगठन को नई दिशा और ऊर्जा प्राप्त हुई।


इसी कार्यकुशलता और समर्पण को देखते हुए संघ संगठन ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी। यह पद संगठनात्मक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसमें नीति निर्धारण, संगठन विस्तार और समन्वय की बड़ी जिम्मेदारी शामिल होती है।
राठौर जी की यह पदोन्नति ऐसे समय में हुई है, जब वे संस्कृत विषय में पीएचडी पूर्ण कर शीघ्र ही डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने जा रहे हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत शैक्षणिक जीवन के लिए गौरव का विषय है, बल्कि शिक्षक समाज और संस्कृत जगत के लिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है। संस्कृत जैसे शास्त्रीय विषय में उच्च शोध कार्य कर डॉक्टरेट प्राप्त करना उनकी विद्वत्ता, साधना और निरंतर अध्ययनशीलता का प्रमाण है।
शिक्षा के क्षेत्र में उनका मानना है कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन और मूल्यों की आधारशिला है। उन्होंने अपने शिक्षण कार्य के साथ-साथ संस्कृत के प्रचार-प्रसार और उसके प्रति विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने के लिए अनेक शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाई है।


प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति के बाद विवेक कुमार राठौर ने संगठन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह दायित्व उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि संगठन ने जिस विश्वास के साथ उन्हें यह भूमिका सौंपी है, वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ उस पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। संगठन के उद्देश्यों, शिक्षक हितों और शैक्षणिक मूल्यों को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकता रहेगी।
उनकी इस पदोन्नति एवं आगामी डॉक्टरेट उपाधि पर प्रदेश एवं जिला स्तर के अनेक पदाधिकारियों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। सभी ने आशा व्यक्त की है कि उनके अनुभव, नेतृत्व क्षमता और शैक्षणिक दृष्टिकोण से संगठन और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनेगा।
कुल मिलाकर, विवेक कुमार राठौर की प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर पदोन्नति और शीघ्र मिलने वाली डॉक्टरेट उपाधि यह प्रमाणित करती है कि समर्पण, निरंतर परिश्रम और स्पष्ट उद्देश्य के साथ किया गया कार्य निश्चित रूप से सम्मान और सफलता दिलाता है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। विवेक राठौर जी श्री श्री रितेश्वर जी सतगुरु देव भगवान के प्रथम शिष्य छत्तीसगढ़ प्रदेश से हैं

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