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धान की खेती छोड़ अपनाई ग्राफ्टेड बैंगन की खेती

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धान की खेती छोड़ अपनाई ग्राफ्टेड बैंगन की खेती

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आधुनिक तकनीक से किसान की आय में हुई कई गुना बढ़ोतरी

सक्ती,
कलेक्टर  अमृत विकास तोपनो के निर्देशानुसार जिले में विभिन्न विभागों के माध्यम से संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद और पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। इसी क्रम में उद्यानिकी विभाग की योजनाएं किसानों के लिए आर्थिक उन्नति का सशक्त माध्यम बन रही हैं। सक्ती जिले के विकासखंड मालखरौदा अंतर्गत ग्राम छोटे रबेली निवासी किसान श्री राजु मधुकर की सफलता इसकी जीवंत मिसाल है, जिन्होंने परंपरागत धान की खेती के स्थान पर आधुनिक तकनीक से ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाकर अपनी आय में जबरदस्त बढ़ोतरी की है।

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राजु मधुकर लंबे समय से लगभग 05 एकड़ भूमि में धान की खेती कर रहे थे। बढ़ती लागत और सीमित उत्पादन के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। धान की खेती से उन्हें औसतन 105 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था, जिसमें लगभग ₹1 लाख 10 हजार की लागत आती थी। बाजार में विक्रय से करीब ₹3 लाख 15 हजार की आमदनी होती थी, जिससे लागत घटाने के बाद शुद्ध आय मात्र ₹2 लाख 05 हजार रह जाती थी, जो परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी।

वर्ष 2024–25 में उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग से उन्होंने खेती में नवाचार अपनाते हुए ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की। आधुनिक तकनीक, उन्नत पौध सामग्री और वैज्ञानिक तरीकों के उपयोग से फसल का उत्पादन उल्लेखनीय रूप से बढ़ा। उसी 05 एकड़ भूमि में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से लगभग 600 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ।

इस फसल पर कुल लागत करीब ₹3 लाख 50 हजार आई, जबकि बाजार में विक्रय से लगभग ₹10 लाख 80 हजार की आमदनी हुई। इस प्रकार ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से किसान को लगभग ₹7 लाख 30 हजार की शुद्ध आय प्राप्त हुई, जो परंपरागत धान की खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।

इस बदलाव से न केवल किसान की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई, बल्कि उन्हें खेती से स्थायी रोजगार भी प्राप्त हुआ। साथ ही, फसल की देखरेख और तुड़ाई के दौरान अन्य ग्रामीणों को भी रोजगार के अवसर मिले। आज श्री राजु मधुकर की यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।

किसान श्री राजु मधुकर ने इस उपलब्धि के लिए शासन-प्रशासन द्वारा मिले सहयोग पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कलेक्टर श्री अमृत विकास तोपनो एवं उद्यानिकी विभाग का आभार जताया है। उनकी यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं, विभागीय मार्गदर्शन और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

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