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मध्यप्रदेशराज्य

विवादित टिप्पणी केस: IAS को राहत देने वाले जज पर उठे सवाल, हाई-लेवल जांच के संकेत

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इंदौर 
ब्राह्मण बेटियों पर असभ्य टिप्पणी करने वाले विवादित आइएएस अधिकारी (IAS) व मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) के अध्यक्ष संतोष वर्मा पर दर्ज फर्जीवाड़ा केस की फाइल खुल गई है। इस मामले में पुलिस एक न्यायाधीश पर कड़ी कार्रवाई कर सकती है। पुलिस ने हाई कोर्ट की अनुमति के बाद न्यायाधीश से पूछताछ के लिए 50 सवालों की सूची तैयार की है।

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फर्जी आदेश दिखाकर पदोन्नति का रास्ता साफ किया
दरअसल वर्मा ने कूटरचित न्यायालय आदेश के जरिए आइएएस कैडर में पदोन्नति प्राप्त की थी। उनके खिलाफ एक महिला ने शारीरिक शोषण का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मामले में उन्होंने बरी होने का फर्जी आदेश दिखाकर आइएएस कैडर में पदोन्नति का रास्ता साफ किया था। मामला खुला तो इसमें स्पेशल जज विजेंद्र सिंह रावत की भूमिका भी संदिग्ध मिली। तब उनका तबादला कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।
 
हाई कोर्ट ने विधि अनुसार कार्रवाई की अनुमति दी
मामला हाई कोर्ट में चल रहा था। चार वर्ष पुराने इस केस में पुलिस अभी तक हाई कोर्ट की अनुमति का इंतजार कर रही थी। एसीपी विनोद दीक्षित ने हाई कोर्ट से मिली अनुमति की पुष्टि करते हुए कहा है कि कोर्ट ने पुलिस के प्रतिवेदन पर विधि अनुसार कार्रवाई की अनुमति दे दी है।

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न्यायाधीश का निलंबन हुआ तो एसआइटी सक्रिय हुई
न्यायालय का फर्जी आदेश बनाए जाने के मामले में जांच में पता चला था कि मास्टरमाइंड स्वयं न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत हो सकते हैं जो वर्ष 2021 में जिला कोर्ट में पदस्थ रहे हैं। संदेह के आधार पर हाई कोर्ट ने उनका तबादला कर दिया, लेकिन गिरफ्तारी की अनुमति नहीं दी।

न्यायाधीश को नोटिस जारी कर बुलाया जाएगा
उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद हाल ही में विवादित न्यायाधीश का निलंबन हुआ तो पुलिस की एसआइटी सक्रिय हुई और अग्रिम कार्रवाई की अनुमति मांगी। हाई कोर्ट ने 20 नवंबर को विधि अनुसार कार्रवाई करने की हरी झंडी दे दी। जांच में शामिल एक अफसर के अनुसार न्यायाधीश को नोटिस जारी कर बुलाया जाएगा। गौरतलब है कि वर्मा को भी चार वर्ष पूर्व इसी तरह बुलाकर गिरफ्तार किया था।

हार्ड डिस्क रिकवर करवाने पर मिले फर्जी फैसले के सबूत
पुलिस को जांच की शुरुआत से ही न्यायाधीश पर शक था। पुलिस ने उनकी कोर्ट से कंप्यूटर जब्त किया तो फैसला डिलीट मिला। हार्ड डिस्क जब्त कर फोरेंसिक लैब में जांच करवाई गई। हार्ड डिस्क में दो फैसले मिले, जिसमें एक राजीनामा और दूसरा बरी का बनाया गया था। न्यायाधीश ने खुद को छुट्टी पर बताया था, लेकिन मोबाइल टावर लोकेशन निकालने पर कोर्ट में ही उनकी मौजूदगी मिली। इसके बाद साक्ष्य एकत्र हो गए। पुलिस को वर्मा की चैटिंग से भी अहम सबूत मिला है। वर्मा को एक अन्य मजिस्ट्रेट ने न्यायाधीश के पास भेजा था। उसकी वर्मा से लेनदेन संबंधित चैटिंग हो रही थी।

जय युवा आदिवासी संगठन संतोष वर्मा के समर्थन में आया
जय युवा आदिवासी संगठन (जयस) संतोष वर्मा के समर्थन में आया है। जयस प्रमुख लोकेश मुजाल्दा ने बताया कि उनका संगठन और अजाक्स की तरफ से संतोष वर्मा के पक्ष में रविवार को इंदौर में कलेक्टर के नाम ज्ञापन दिया जाएगा, जिसमें संतोष वर्मा को शासन की ओर से दिया गया नोटिस वापस लेने की मांग की जाएगी। इधर, जयस के संरक्षक विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने कहा उनके संगठन के नाम से ही मिलता-जुलता एक अन्य संगठन भी है। इस संगठन से उनका कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि संतोष वर्मा का बयान असभ्य है जो अस्वीकार है।
 

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