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Land Use Policy Update: कृषि जोन में उद्योग स्थापना को मंजूरी, नए नियम हुए लागू

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चंडीगढ़ 
हरियाणा सरकार ने कृषि ज़ोन में उद्योगों की राह में सबसे बड़ी रुकावट माने जाने वाले सड़क मानकों को नरम कर दिया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की ओर से जारी नई पॉलिसी ने ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक विकास का दरवाज़ा पहले से कहीं ज्यादा खोल दिया है। अब निवेशकों को चौड़ी सड़क ढूंढने के झंझट में नहीं फंसना पड़ेगा और छोटे गांवों तक औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होने का रास्ता साफ़ हो गया है। वहीं, हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी डेवलपमेंट प्लानों में लागू मिक्सड लैंड यूज (एमएलयू) के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है।

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सरकार ने 19 मार्च, 2021 की नीति के सब-क्लॉज 3बी को बदलते हुए नए मानक लागू किए हैं। पहले कृषि ज़ोन में उद्योगों के लिए न्यूनतम 33 फीट चौड़ी सड़क अनिवार्य थी, जिसके कारण कई प्रोजेक्ट काग़ज़ों में ही अटक जाते थे। लेकिन नई व्यवस्था के तहत 20 फीट चौड़ी मौजूदा गांव लिंक रोड, या 33 फीट राजस्व/स्व-निर्मित पंचायत रास्ता को भी उद्योग लगाने के लिए वैध अप्रोच माना जाएगा। यह बदलाव उन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ा अवसर है, जहां चौड़ी सड़कें उपलब्ध नहीं थीं।

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हाईवे कनेक्टिविटी वाले उद्योगों को भी बड़ा फायदा
नई पॉलिसी में उन निवेशकों को भी राहत मिली है जिनकी साइटें नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे या शेड्यूल रोड से सीधी जुड़ी हैं। ऐसे मामलों में अब एक्सेस परमिशन मिलते ही सीएलयू की मंजूरी मिल सकेगी। इससे हाईवे किनारे औद्योगिक बेल्ट्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सभी विभागों को भेजे नये आदेश
नए आदेश की प्रति उद्योग विभाग, अर्बन लोकल बॉडीज़ और इंडस्ट्रीज़ एंड कॉमर्स विभाग को भेज दी गई है, ताकि इसे जमीनी स्तर पर तुरंत लागू कराया जा सके। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ की भावना के अनुरूप है, जहां उद्योगों पर अनावश्यक शर्तें कम कर निवेश का माहौल तैयार किया जा रहा है। आगामी वर्षों में ग्रामीण हरियाणा में रोजगार, ढांचागत विकास और छोटी औद्योगिक इकाइयों की संख्या में तेजी आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

हरियाणा में मिक्सड लैंड यूज के नियम बदले
हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी डेवलपमेंट प्लानों में लागू मिक्सड लैंड यूज (एमएलयू) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब मिक्सड लैंड यूज में कौन-सी गतिविधि बिल्कुल भी नहीं चलेगी। इसके लिए एक 12 बिंदुओं की प्रतिबंधित सूची जारी की गई है। नए नियम के बाद जिन गतिविधियों का नाम इस सूची में नहीं है, वे सभी मिक्सड लैंड यूज जोन में अनुमति योग्य मानी जाएंगी।

यह आदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की तरफ से जारी किया गया है। आदेश गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत और हिसार मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटीज सहित सभी संबंधित विभागों को भेजा गया है। पहले मिक्सड लैंड यूज को लेकर अक्सर यह उलझन रहती थी कि कौन-सा व्यवसाय या उपयोग इस ज़ोन में आते हैं और कौन-सा नहीं।
 
कई बार आवेदन महीनों तक अटके रहते थे। अब सरकार ने इस समस्या को खत्म करते हुए साफ निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित सूची में जो गतिविधियां हैं, वे नहीं चलेंगी। बाकी सब नियमों के अनुसार मान्य रहेंगी। इससे विभागों के बीच होने वाली अस्पष्टता खत्म होगी और डेवलपर्स व व्यवसायियों को मंजूरी लेने में आसानी होगी।

इन 12 गतिविधियों पर पूरी तरह रोक
सरकार ने जिन उपयोगों को मिक्सड लैंड यूज जोन में पूरी तरह प्रतिबंधित किया है, उनमें हैवी इंडस्ट्रीज़, कचरा डंपिंग और लैंडफिल साइट्स, केमिकल और पेट्रोकेमिकल प्लांट्स, न्यूक्लियर पावर से जुड़ी इंस्टॉलेशन, स्लॉटर हाउस और टैनरी, डेयरियां, पोल्ट्री और पिगरी यूनिट्स, ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, माइनिंग व क्वारिंग गतिविधियां, कब्रिस्तान, श्मशान भूमि, फार्महाउस तथा प्रदूषणकारी या हानिकारक गतिविधियां पर पाबंदी लगाई है। फार्म हाउस को इस जोन में पहली बार बैन किया गया है। साथ ही, उन सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी, जिसे सरकार आगे सार्वजनिक हित में प्रतिबंधित घोषित करे।

सभी मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटीज को निर्देश
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की ओर से प्रदेश की पांचों मेट्रोपोलिटन डेवलेपमेंट अथॉरिटीज को इस संदर्भ में निर्देश जारी किए हैं। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत व हिसार अथॉरिटी शामिल हैं। अथॉरिटीज को इन नियमों को तुरंत प्रभाव से लागू करने के लिए कहा गया है। इन सभी प्राधिकरणों को अपने-अपने डेवलपमेंट प्लानों में नई सूची के अनुसार संशोधन करने होंगे।
आवेदन की प्रक्रिया होगी आसान

नया नियम लागू होने के बाद मिक्सड लैंड यूज से जुड़े आवेदन पहले की तुलना में जल्दी निपटेंगे। जिन गतिविधियों पर प्रतिबंध नहीं है, उनके लिए विभाग को अलग से व्याख्या देने या स्पष्टीकरण मांगने की जरूरत नहीं रहेगी। इससे निवेशकों को स्पष्टता मिलेगी, डेवलपमेंट की गति बढ़ेगी और अनियमित उपयोग पर रोक लगेगी। सरकार का मानना है कि इससे योजनाबद्ध शहरी विकास को मजबूती मिलेगी और शहरों में असंगत या प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को जड़ से रोका जा सकेगा।

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