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छत्तीसगढ़बलरामपुर

भूमि नामांतरण प्रक्रिया में हल्का पटवारी और तहसीलदार की भूमिका संदिग्ध

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राजपुर – तहसील राजपुर कार्यालय एक बार फिर सुर्खियों में है। आरोप है कि कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी नामांतरण आदेश पारित कर दिए गए हैं। इस पूरे मामले में हल्का पटवारी अजेन्द्र टोप्पो और राजपुर तहसीलदार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आमजन पहले से ही तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली से परेशान हैं। न तो पटवारी नियमित रूप से अपने हल्का मुख्यालय में बैठते हैं और न ही निवास करते हैं। इसके बावजूद, तहसीलदार और एसडीएम के संरक्षण में ये मनमर्जी से कार्य करते हैं।

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कबीर दास की भूमि पर फर्जी नामांतरण का आरोप
ग्राम कदोरा, तहसील राजपुर निवासी कबीर दास ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि पटवारी अजेन्द्र टोप्पो, नोटरी और तहसीलदार की मिलीभगत से उनकी भूमि का फर्जी नामांतरण कर दिया गया।
कबीर दास के स्वामित्व वाली भूमि—
खसरा नंबर: 129/1, 130, 133, 131, 132, 206
कुल रकबा: 0.2808, 0.0618, 0.4058, 0.0128, 0.7608, 0.10 हेक्टेयर
इन सभी जमीनों पर अनावेदक सोमारु पिता रिझन निवासी बाबा पारा, तहसील प्रतापपुर ने फर्जी तरीके से कब्जा जमाने का प्रयास किया।
कबीर दास के अनुसार, 12 अगस्त 2025 को नोटरी के समक्ष उनकी अनुपस्थिति में एक फर्जी सहमति पत्र तैयार किया गया। इसके आधार पर पटवारी अजेन्द्र टोप्पो ने फर्जी प्रतिवेदन बनाकर सोमारु के नाम पर नामांतरण कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि अनावेदक सोमारु ग्राम कदोरा का निवासी भी नहीं है।
आवेदक की मांग
कबीर दास ने कहा कि उन्हें इस धोखाधड़ी का पता तब चला जब नामांतरण से संबंधित नोटिस प्राप्त हुआ। उन्होंने इस फर्जी और अवैध नामांतरण को निरस्त करने की मांग की है।

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रिपोर्टर,,,, कृष्ण नाथ टोप्पो,,,,बलरामपुर

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