छत्तीसगढ़राजनांदगांव

कृषि विज्ञान केन्द्र सुरगी द्वारा किसानों को दी गई समसामयिक सलाह

राजनांदगांव से राधेश्याम शर्मा की रिपोर्ट

राजनांदगांव।  कृषि विज्ञान केन्द्र सुरगी द्वारा खड़ी फसल की सुरक्षा करने के लिए किसानों को विशेष सलाह दी गई है। विशेष सलाह में कहा गया है कि मौसम पुर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में मध्यम वर्षा होने की संभावना है। जिसे देखते हुए कवकनाशी एवं उवर्रकों का छिड़काव मौसम साफ रहने पर ही करने की सलाह दी गई है। धान के खेत में हरी काई का प्रकोप दिख रहा हो तो पानी को निकाल दें। खेत में जिस जगह से पानी अन्दर जाता है, वहां आवश्यकतानुसार कॉपर सल्फेट को पोटली में बांधकर रखें।

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धान कन्से निकलने की अवस्था में हो वहां नत्रजन उवर्रक की दूसरी मात्रा का छिड़काव यूरिया (30 किलोग्राम प्रति हेक्टर) के रूप में करें। जीवाणु जनित झुलसा रोग की रोकथाम के लिए संतुलित उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। रोग होने की दशा में पोटाश का उपयोग 8-10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। तना छेदक रोग के लक्षण दिखाई दे तो, कर्टाप हाइड्रोक्लोराइड 50 डब्लूपी एक किलोग्राम प्रति हेक्टेयर (काल्डेन, कैरीड, मोर्टार एवं अन्य समान उत्पाद) या क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 150 मिली प्रति हेक्टयेर (फटेरा, कोरेजन, फटेगोल्ड, लेपिडोज एवं अन्य समान उत्पाद) की दर से 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। नत्रजन का छिड़काव कुल अनुशंसित मात्रा की एक चौथाई मात्रा (30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर), रोपाई के 25-30 दिनों के बाद यूरिया के रूप में छिड़काव करें। तत्पश्चात खेतों में पानी लगभग 24 घंटे तक रोककर रखें। पोटाश की शेष 25 प्रतिशत मात्रा रोपाई के 25-30 दिनों के बाद छिड़काव करें। धान में शीथ ब्लाइट रोग के लक्षण दिखाई दे, तो हेक्साकोनाजोल नामक कवकनाशी 1 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करें।

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जिन स्थानों पर सोयाबीन की फसल में गर्डल बीटल (चक्र भृग) का प्रकोप शुरू हो गया हो, वहां पर थाइक्लोपीड 21.7 एससी 750 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। सोयाबीन की फसल में पत्ती खाने वाली इल्लियों तथा सफेद मक्खी के नियंत्रण हेतु पूर्व मिश्रित कीटनाशक बीटासायफ्लुथ्रीन इमिडाक्लोपीड 350 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा थायमिथाक्सम-लेम्बडा सायहेलोथ्रीन 125 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। इस उपाय से तना मक्खी का भी नियंत्रण होगा। अरहर की फसल में तना अंगमारी (स्टेम ब्लाइट) रोग प्रकोप की प्रारंभिक अवस्था में ताम्रयुक्त कवकनाशी (2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) या मेटालेक्सिल एमजेड (1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिड़काव 10-12 दिन के अंतर में, दो-तीन बार उपयोग करने से रोग की रोकथाम की जा सकती है।

मूंग व उड़द की फसल में भभूतिया रोग (पाउडरी मिल्ड्यू) के लक्षण दिखाई देने पर घुलनशील गंधक (सल्फेट एवं अन्य सामान उत्पाद) 3 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। पौधों को सफेद मक्खी के आक्रमण से बचाने के लिए इमिडाक्लोप्रीड (कोंफीडोर एवं अन्य सामान उत्पाद) 0.5 मिली प्रति लीटर कीटनाशक का छिड़काव करें। मौसम पुर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में मध्यम वर्षा होने की संभावना है। किसान को मूंग व उड़द फसल में अतिरिक्त जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।

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