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स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिला सक्ती बना स्वच्छता का मॉडल स्वच्छाग्राही दीदियों की मेहनत से सक्ती में बदली स्वच्छता की तस्वीर

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ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन से जिला सक्ती में स्वच्छता की बड़ी सफलता

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सक्ती
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत जिला सक्ती में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं। जिले की ग्राम पंचायतों में स्वच्छाग्राही दीदियों की सक्रिय सहभागिता से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था सुदृढ़ हुई है, जिससे गांवों में स्वच्छता और स्वास्थ्य के मानक बेहतर हुए हैं।

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संग्रहित कचरे का वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निपटान सुनिश्चित किया जा रहा है। प्लास्टिक अपशिष्ट को प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट में भेजा जा रहा है, जबकि पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को कबाड़ी के माध्यम से विक्रय किया जा रहा है। इस व्यवस्था से स्वच्छाग्राही दीदियों को प्रतिमाह औसतन 10 से 12 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है, जिससे स्वच्छता सेवा के साथ-साथ सशक्त आजीविका का सृजन भी हो रहा है।


जिले में वर्तमान में चार प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन यूनिट संचालित हैं, जिन्हें सभी विकासखंडों में स्थापित किया गया है। इन यूनिटों के माध्यम से ग्राम पंचायतों से एकत्रित प्लास्टिक कचरे का संकलन एवं सुरक्षित निस्तारण किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतें प्लास्टिक मुक्त घोषित की जा चुकी हैं, जबकि शेष पंचायतों को भी शीघ्र प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में कार्य जारी है। इससे गांवों में स्वच्छ वातावरण निर्मित हुआ है और नागरिकों को सुरक्षित एवं स्वास्थ्यकर परिवेश प्राप्त हो रहा है।
एफएसटीपी, सामुदायिक शौचालय एवं जनभागीदारी से ओडीएफ प्लस को मिली मजबूती
जिला सक्ती में स्वच्छता को स्थायित्व प्रदान करने के उद्देश्य से सात फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) का निर्माण किया गया है। इन प्लांटों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले मलजल का वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निपटान सुनिश्चित किया जा रहा है। इससे शौचालय उपयोग को बढ़ावा मिला है तथा ग्रामीणों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता में वृद्धि हुई है।
नए परिवारों द्वारा अनिवार्य रूप से शौचालय निर्माण कराया जा रहा है, जिससे स्वच्छता व्यवहार में निरंतरता बनी हुई है। इसके साथ ही जिले में दुकानों के साथ सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कर उन्हें आजीविका से भी जोड़ा गया है। स्वच्छाग्राही समूहों एवं ग्रामीणों द्वारा इन परिसरों में किराना दुकान, सीएससी सेंटर, सैलून आदि व्यवसाय संचालित किए जा रहे हैं, जिससे शौचालयों का नियमित रख-रखाव सुनिश्चित होने के साथ-साथ ग्रामीणों को अतिरिक्त आय के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
जनपद पंचायत सक्ती क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में जन चौपाल, बैठकों एवं विद्यालयों के माध्यम से व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे ओडीएफ प्लस की स्थिति को बनाए रखा जा रहा है। विकासखंड जैजैपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत मुक्ता ने वर्ष 2023-24 में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन का लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त कर प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। वहीं मालखरौदा विकासखंड की छपोरा, कुरदा, बंदोरा, बडेमुडपार, चरौदी, सकर्रा, मरघटी, बड़े रवेली, कुलबा एवं माहुलदीप सहित अनेक ग्राम पंचायतों में स्व-सहायता समूहों द्वारा नियमित गार्बेज कलेक्शन कर ओडीएफ प्लस को साकार किया जा रहा है।
इन समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप जिला सक्ती की ग्राम पंचायतें स्वच्छ, हरी-भरी एवं स्वस्थ ग्रामीण व्यवस्था की ओर निरंतर अग्रसर हैं, जहां स्वच्छता अब अभियान नहीं बल्कि जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।

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