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छत्तीसगढ़जशपुर नगर

दीया तले अंधेरा – भाग 2

फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज से शैलेंद्र कुमार

जनपद मुख्यालय के करीब सड़क निर्माण पर उठे सवाल

फरसाबहार जनपद पंचायत क्षेत्र में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। जनपद मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित यादव टोली में निर्मित सीसी रोड की स्थिति स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

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जानकारी के अनुसार, इस सड़क निर्माण कार्य की लागत लगभग 8 लाख रुपये बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य को पूरा हुए अभी लगभग एक वर्ष ही हुआ है, लेकिन सड़क कई स्थानों पर उखड़ने लगी है और उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

फरसाबाहर जनपद  पांचयात के  आस पास होने वाले निर्माण कार्यों मे  हो रही खुले आम धांधली  रुकने का नाम लेने  तैयार नहीं,

आठ लाख रुपये का निर्माण कार्य,जो अपनी कहानी स्वयं बया कर रहा,
फरसाबाहर जनपद से बहुत ही करीब यादव टोली मे एक सी, सी, रोड का निर्माण कार्य किया गया जिसकी लागत आठ लाख दर्शाई  जा रही है,,  एक साल पूर्ण होते होते,उखड़ने  लगी,

एक ओर भारतीय जनता पार्टी की सरकार  सड़कों का जाल बिछाने मे लगी है  वही  इस जनपद मे ग्राम पंचयात की भूमिका अनेको संदेह को जन्म देती नज़र  आ रही,, क्या सडक निर्माण का कोई माप दंड  नहीं,,, और अगर माप दंड का तरीका यही है तो सरकार क्या सडक निर्मानो मे  ही अर्थ व्यवस्था  को पूरा झोक दे,

जब हमने ग्राम पंचयात सचिव से इस सडक की  हालत के बारे मे जानकारी चाही, तो उनका जवाब था, मेरे पदभार लेने के पहले ही निर्माण कार्य  हो चूका था,

अब सवाल ये उठता है कि जिम्मेदारी किसकी, और कौन इतनी बदहाल इस्थिति का जिम्मेदार, बहरहाल आप हमारे साथ निरंतर बने रहिये, हम और भी सड़कों के साथ आप को अवगत कराते चलेंगे, देखिये आगे किस नेता के शह पर हो रही धांधली,

तब इस प्रकार के निर्माण कार्यों की स्थिति विकास योजनाओं की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिन्ह लगा रही है। लोगों का मानना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किए जाएं तो सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकता है।

इस संबंध में जब ग्राम पंचायत सचिव से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि उक्त सड़क का निर्माण उनके पदभार ग्रहण करने से पहले किया गया था। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य उनके कार्यकाल से पूर्व का है, इसलिए उसके संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सड़क की वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी मानकों का पालन किया गया था? यदि नहीं, तो इसकी जवाबदेही किसकी बनती है? ऐसे कई प्रश्न हैं जिनके उत्तर अभी भी सामने आने बाकी हैं।

फिलहाल ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की निगाहें संबंधित विभागों की ओर हैं। उम्मीद की जा रही है कि मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाएगी और यदि कहीं लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

(क्रमशः…)

अगले भाग में हम क्षेत्र के अन्य निर्माण कार्यों की स्थिति और उनसे जुड़े तथ्यों को सामने लाने का प्रयास करेंगे।

यह संस्करण समाचार पत्र प्रकाशन के लिए संतुलित, तथ्यात्मक और कानूनी दृष्टि से सुरक्षित रखा गया है, जिसमें बिना प्रमाण किसी व्यक्ति या नेता पर सीधे आरोप नहीं लगाए गए हैं।

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